डाकू से ऋषि || आचार्य प्रशांत https://www.youtube.com/shorts/UYQK4NBykGw Collaboration Link - https://studio.youtube.com/channel/UCMgapddJymOC6MBOiOqia1A/collaboration/UCaZapahNs8WwzN9CCZJ6Z8g Hindi Original Transcription कहते हैं... कोई ऋषि जा रहे थे जंगल से। उनको लूटने की कोशिश करी— तो ऋषि बोले: "लूट ले! लेकिन... जिनके लिए लूट रहा है, तेरे काम नहीं आने के।" डाकू बोला: "अगर आपकी बात सही है, तो आपको ससम्मान जंगल से बाहर निकालने की जिम्मेदारी मेरी है। लेकिन— अगर आपकी बात गलत है... तो सर कटेगा आपका!" बोलता है: "यहीं रुको!" दो-चार लोगों से वहीं पकड़वा के बोले: "यहीं रुके रहो! मैं घर जा रहा हूँ... पता करके आता हूँ, इन्होंने जो बोला सही है कि नहीं।" घर जाता है। पत्नी को पकड़ता है। बोलता है: "बता! ये जो मैं पाप कर रहा हूँ, मेरे साथ नर्क जाएगी?" पत्नी में भी ना जाने कहाँ से ईमानदारी आ गई उस क्षण। बोलती है: "नर्क छोड़ दो... इन सब पापों के लिए तुम जेल जाओगे, मैं तो भी नहीं साथ जाऊंगी!" एक बार को... झटका लगता है। निराशा होती है। अफसोस ह...
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आचार्य भगवत दुबे: जल, जंगल और जमीन की साहित्यिक विरासत
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धरती के महाकवि आचार्य भगवत दुबे जल, जंगल और जमीन की साहित्यिक विरासत संयोजक कुलदीप मंडल विषय-सूची प्रस्तावना खंड I: ज़मीन से जुड़े रचनाकार का उदय (जबलपुर और नर्मदा अंचल) अध्याय 1: माटी का जीवन (1943–वर्तमान) अध्याय 2: साहित्यिक ब्रह्मांड का निर्धारण खंड II: जल, जंगल और जमीन का साहित्यिक सक्रियतावाद अध्याय 3: पर्यावरण बहाली का आह्वान अध्याय 4: विस्थापितों और हाशिए के लोगों की आवाज खंड III: मान्यता, विरासत और आगे का मार्ग अध्याय 5: सम्मान और अकादमिक अमरता अध्याय 6: डिजिटल संरक्षण के लिए एक खाका परिशिष्ट I: प्रमुख प्रकाशित कृतियों का वर्गीकृत अनुक्रमणिका परिशिष्ट II: प्रमुख सम्मानों, पुरस्कारों और मानद उपाधियों का कालक्रम परिशिष्ट III: चुनिंदा मूल पर्यावरण एवं सामाजिक कृतियों का अनुवाद प्रस्तावना ...
अपनी अपनी पीर - दोहे
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अपनी अपनी पीर आचार्य भगवत दुबे (1) जिसके इंगित पर बना, यह सुंदर संसार। बोलो वह कितना सुगढ़, होगा रचनाकार ॥ (2) ईश्वर के प्रति यदि रखें, भक्त अडिग अनुराग । प्रभु कर देंगे प्रज्ज्वलित, स्वयं भक्ति की आग ॥ (3) चाहे 'वाहे' गुरु कहो, या ईश्वर अल्लाह। सच्चे श्रद्धावान के, होते माफ गुनाह ॥ (4) ईश्वर-चिन्तन में सतत, रहता जिनका ध्यान। उनके अन्तस में स्वयं, बसते हैं भगवान ॥ (5) समाधिस्थ तन-मन रहे, निर्मल रहें विचार। भगवन ऐसी साधना, करते हैं स्वीकार ॥ (6) जिसकी आभा हो रही, कण-कण में द्युतिमान। जीव-जन्तुओं में करे, प्राणों का संधान ॥ (7) जो कहते हैं काल्पनिक, दशरथ-नंदन राम । वामपंथ के हैं वही, मन से मूढ़ गुलाम ॥ (8) साईं उसको क्या मिले, जो दंभी सम्पन्न । सच्ची श्रद्धा-भक्ति से, दर्शन करें विपन्न ॥ (9) विपदाओं को देखकर, हो मत व्यथित अधीर । रखो धैर्य विश्वास दृढ़, शंभु हरेंगे पीर ॥ (10) ईश्वर...
Meiteis of Manipur and the Matuas of Bengal: Similar Names, Different Histories
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Two Communities, Two Contexts At first glance, the words Meitei (of Manipur) and Matua (of Bengal) may sound similar. But they point to two very different communities with very different histories. The Meiteis are the main ethnic group of Manipur, originally following indigenous beliefs, later adopting Gaudiya Vaishnavism in the 18th century under King Pamheiba. Their identity is rooted in Tibeto-Burmese origins. The Matuas , on the other hand, are a 19th-century religious reform movement among the Namasudras of Bengal , founded by Harichand Thakur. Their history is about social justice, dignity, and resistance to caste oppression . The only common thread is influence from Bengali Vaishnavism , but the two communities are not genealogically related. The Evolution of the Namasudra / Matua Identity To understand the Matuas, we need to trace their roots. Kaibarta origins : The Kaibartas were an ancient community in Bengal. Some worked on the rivers ( Jala Kaibarta ),...
इंटर्नशिप से नेतृत्व तक: सीखने, सेवा करने और नेतृत्व की एक यात्
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इंटर्नशिप से नेतृत्व तक: सीखने, सेवा करने और नेतृत्व की एक यात्रा इंटर्नशिप से नेतृत्व तक: सीखने, सेवा करने और नेतृत्व की एक यात्रा विषय सूची पुस्तक की रूपरेखा प्रस्तावना भाग 1: प्रशिक्षु का कम्पास भाग 2: संगठन का कम्पास भाग 3: नेतृत्व की यात्रा भाग 4: विस्तारित कम्पास निष्कर्ष पुस्तक सारांश मुख्य शब्दों की सूची पुस्तक की रूपरेखा पुस्तक का शीर्षक: इंटर्नशिप से नेतृत्व तक: सीखने, सेवा करने और नेतृत्व की एक यात्रा प्रस्तावना: चेक-मार्क से परे - इंटर्नशिप के अनुभव को फिर से परिभाषित करना भाग 1: प्रशिक्षु का कम्पास – गहन सीखने और सेवा के लिए मार्गदर्शन अध्याय 1: अपना मार्ग निर्धारित करना - प्रशिक्षु की सक्रिय मानसिकता अध्याय 2: गहन सीखना - हर अनुभव से अधिकतम ज्ञान निकालना अध्याय 3: गहन सेवा - ठोस मूल्य और सार्थक योगदान देना...